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राजस्थान का इतिहास

राठौड़ वंश का इतिहास

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151

सिरोही के कालिन्द्री नामक स्थान पर मारवाड़ के अजीतसिंह को शरण प्रदान की थी

152

सेवकी गाँव के युद्ध में राव गांगा की सहायता की थी

153

हरमाड़ा के युद्ध ई. में मालदेव की सहायता से विजयी

154

‘नैणसी री ख्यात’ व ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ ग्रन्थ हैं

155

‘यदि औरंगजेब मंदिरों को तोड़ देगा तो मैं भी मस्जिदों को तुड़वा दूंगा’ यह कथन है

156

‘राठौड़ वंश महाकाव्य’ के अनुसार राठौड़ों की उत्पत्ति बताई गई है

157

1574 के लिए भेजा

158

अंग्रेजों ने गंगासिंह को उपाधि प्रदान की थी

159

अकबर ने अपनी की नागौर यात्रा के समय जोधपुर दुर्ग

160

अकबर ने अपने नागौर प्रवास के दौरान निर्माण करवाया

161

अनूपसिंह के समय पहली बार गीता का राजस्थानी में अनुवाद किया था

162

ऋग्वेद के अनुसार गंगानगर जिले की दृषद्वती नदी और सरस्वती नदी के मध्य का भाग कहलाता है

163

औरंगजेब के पौत्र बुलन्द अख्तर व पौत्री सफीयतुन्निसा को दुर्गादास ने रखा था

164

औरंगजेब द्वारा दुर्गादास को प्रदान नहीं की गई थी

165

औरंगजेब ने दुर्गादास व अजीतसिंह का दमन करने के लिए नियुक्त किया

166

कन्यावध न करने की शपथ दिलवाई थी

167

कर ली थी

168

ख्यातों के अनुसार रायसिंह को ‘राजपूताने का कर्ण’ की उपाधि दी गई

169

गिरी-सुमेल के युद्ध में शेरशाह का सेनापति था

170

चूँडा वव उसके वंशजों ने निशान के रूप में प्रयोग में वस्तु ली थी

171

जहाँगीर का सबसे विश्वस्त राजपूत नरेश था

172

जांगल जनपद की राजधानी थी

173

जैसलमेर के शासक रावल जैतसी को पराजित कर बन्दी बना लिया था

174

जोधपुर दुर्ग का निर्माण किया गया है

175

दो मुगल बादशाहों अकबर आौर जहाँगीर की सेवा की थी