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वह चित्र शैली जिसमें भित्ति चित्रण बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं है
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वह चित्र शैली जिसमें वल्लभीय अद्बैतवाद की चरम अभिव्यक्ति है
153
वह लोककला जो राजस्थान से सम्बन्धित है
उत्तर
लोक कथाएं, पिछवाईयाँ, साँझी
154
वह शासक जिसके काल में कोटा चित्रकला शैली ने अपना चरमोत्कर्ष प्राप्त किया
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वह स्थान जो अपने मृदा शिल्प के लिए विख्यात है
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सवाई जयसिंह का दरबारी चित्रकार था
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सिरोही शैली की लोक कलात्मक निजी धरोहर है
उत्तर
चटक रंगों का प्रयोग
158
हुक्का पीती स्त्री का चित्र (1816), दशहरा दरबार (1800), दव्याश्रण्य महाकाव्य इत्यादि प्रमुख चित्र हैं
उत्तर
(1255) मारवाड़ शैली के
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‘चन्दूजी का गढ़ा तथा बोडीगामा’ स्थान विख्यात है
160
‘चाँदनी रात की संगोष्ठी’ ग्रंथ के चित्रकार हैं
161
‘बनी ठणी’ को ‘भारत की मोनालिसा’ बताया है
उत्तर
डॉ. एरिक डिंक्सन ने
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‘लाल’ और ‘साहिबराम’ नामक चित्रकार सम्बन्धित हैं
163
‘श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि’ के चित्रकार थे
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ओढ़नी में चारों ओर कोरा पल्ला बना हो और बीच में बड़े फूल हो तो उसे कहते हैं
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कपड़ों में सुनहरे तारों को कहते हैं
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काष्ठ शिल्प के लिए प्रसिद्ध ‘जेठाना गाँव’ स्थित है
167
कोफ्तगिरी का उद्भव हुआ है
उत्तर
दमिश्क (सीरिया की राजधानी) में
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घोड़े के पार्श्व की दोनों टांगों में एक साथ बांधी जाने वाली रस्सी है
169
चढ़वा जाति के परिवार प्रसिद्ध हैं
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जमुनादास, सालिगराम और नन्दराम चित्रकार संबंधित रहे हैं
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पत्थरों को काट-छांटकर भवनों में उपयोग के योग्य बनाने वाला कारीगर कहलाता है
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पत्थरों, ढालों, तलवारों, कटार आदि पर सोने-चांदी के रंगों द्वारा मांडणे बनाया जाता है
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प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन संबंधित हैं
उत्तर
मेवाड़ चित्रकला शैली से
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पड़ कला का प्रमुख केन्द्र स्थित है
उत्तर
शाहपुरा (भीलवाड़ा) में
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बातिक कला के लिए प्रसिद्ध है