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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : संगीत, नृत्य, नाट्य एवं वाद्ययंत्र

227 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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राजस्थान का वह लोक नाट्य जो मेरू नाट्य के नाम से जाना जाता है

152

राजस्थान का वह शहर जहाँ से प्रसिद्ध नृत्य ढोल का आरंभ हुआ था

153

राजस्थान का सबसे प्राचीन लोकनाट्य माना जाता है

154

राजस्थान के जैसलमेर जिले से संबंधित है

155

राजस्थान के डीग (भरतपुर) में जानकीलाल ने प्रचलन प्रारंभ किया

156

राजस्थान के लोकनाट्य जिसमें सुसज्जित मंच बनाए जाते हैं

157

राजस्थान में एक विरह गीत है

158

राजस्थान में रासलीला का प्रमुख केन्द्र है

159

राजस्थान में हाथरसी ख्याल जाने जाते हैं

160

राणा कुम्भा को दक्षता हासिल थी

161

लोक संगीत की विधा तालबन्दी गायकी राजस्थान में प्रसिद्ध है

162

लोकनाट्य विधा है

163

वह नृत्य जिसका प्रारंभ पुरुषों द्वारा हाथ में तलवार लेकर या छाता लेकर करते हैं

164

वह लघु नाटिका जिसमें एक व्यक्ति द्वारा अपनी धर्म बहिन की अंगूठी को मछली के पेट से वापस लाने की कहानी का मंचन होता है

165

वाद्य रहित नृत्य है

166

शाहजहाँ के समय प्रचलित नाहर नृत्य जो शाहजहाँ के मनोरंजन के लिए कृत्रिम रूप से शेर-शिकार के आयोजन के साथ प्रारम्भ हुआ, वह प्रसिद्ध है

167

सबसे अधिक नौटंकियाँ (नौटंकी मंडलियाँ) होती हैं

168

सर्वप्रथम राज्य के जयपुर जिले में शुरू हुआ

169

हवेली संगीत के गायक हैं

170

हुरंगा का आयोजन किया जाता है

171

होली व गणगौर पर गाया जाता है

172

‘कन्हैया ख्याल’ नामक लोकनाट्य (संगीत दंगल) अनुपम विशेषता है

173

‘गीगला रा बापू’ और ‘लड़े सूरमा आज जी’ से संबंधित हैं

174

‘छिद्रित मटका जिसमें दीपक जलता है’ यह विशेषता है

175

‘दुकाली’ नामक वाद्य मुख्यत: बजाते हैं