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संत मावजी का संबंध है
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संत रज्जब जी की प्रमुख गद्दी है
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संत रैदासजी की छतरी राजस्थान में स्थित है
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सूफी संत शेख हमीदुद्दीन की मजार है
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स्वामी लाल गिरी द्वारा प्रवर्तित अलखिया सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ स्थित है
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हठ योग प्रणाली का जन्मदाता माना जाता है
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‘ईश्वर मनुष्य के सदगुण को पहचानता है तथा उसकी जाति नहीं पूछता, आगामी दुनिया में कोई जाति नहीं होगी’ यह सिद्धान्त है
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‘राजस्थान का नृसिंह’ कहा जाता है
उत्तर
भक्त कवि दुर्लभ जी को
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कायस्थ जाति की उपजाति जो राजस्थान की मूल निवासी है
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किशनगढ़ के शासक सावंतसिंह सम्बन्धित थे
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खींची राजपूत शाखा के थे
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गरीब दासजी, संत दासजी, जगन्नाथ जी, माधोदासजी आदि संतों का संबंध माना जाता है
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जांभोजी की प्रमुख कार्यस्थली रही
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जीवन भर दूल्हे के वेश में रहते हुए दादू के उपदेशों का बखान करने वाले संत थे
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दादू के शिष्यों में सबसे ऊँचा स्थान माना जाता है
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दादू पंथ के सत्संग कहलाते हैं
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दादू पंथ में ‘नागा साधु पंथ’ की नींव रखी
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निम्बार्क सम्प्रदाय के अधिक निकट है
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निरंजनी संप्रदाय की प्रमुख पीठ स्थित है
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भक्ति आंदोलन का ‘आदि पुरुष’ कहा जाता है
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मीराबाई का जन्म हुआ था
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राजस्थान में कृष्ण को समर्पित वैष्णव सम्प्रदाय की ‘द्वारकाधीश’ नाम से प्रसिद्ध मुख्य पीठ स्थित है
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राजस्थान में भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक थे
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राजस्थान में ‘रामानंदी संप्रदाय’ का आरम्भ किया था
उत्तर
कृष्णदासजी ‘पयहारी’ ने
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राजस्थान राज्य में प्रचलित वह सम्प्रदाय जो सगुण एवं निर्गुण भक्ति मार्ग का मिश्रण है