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राजस्थान का इतिहास

राजस्थान के इतिहास के स्रोत (अभिलेख एवं सिक्के)

207 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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176

गुर्जर-प्रतिहार कालीन मुद्राएँ हैं

177

चित्तौड़गढ़ दुर्ग के जैन कीर्तिस्तम्भ में उत्कीर्ण तीन अभिलेखों का स्थापनाकर्त्ता था

178

जनपद के सिक्के प्राप्त हुये थे

179

जूनागढ़ प्रशस्ति के रचयिता थे

180

जैन धर्म सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ स्तूप है

181

जैसलमेर राज्य का ताँबे का सिक्का कहलाता था

182

जो देश में उत्खनन से प्राप्त मुद्राओं की सर्वाधिक संख्या है, राजस्थान में स्थित है

183

टोंक जिले के नगर कस्बे में लगभग तांबे के मालव

184

पुराण, कार्षापण, पण आदि नामों से पुकारा जाता था

185

बसंतगढ़ का शिलालेख संबंधित है

186

बिजौलिया शिलालेख की स्थापना की गई थी

187

बिजौलिया शिलालेख के रचयिता थे

188

भरतपुर के नगलाछैल (बयाना तहसील) नामक स्थान से सर्वाधिक सिक्के मिले हैं

189

मथुरा के शक क्षत्रपों के सिक्के राजस्थान में प्राप्त हुए हैं

190

महाराणा मोकल के शासन काल से संबंधित लेख है

191

मिहिरभोज की प्रशस्ति के रचयिता थे

192

मुहणौत नैणसी री ख्यात के अनुसार राजस्थान के राठौड़ वंश की उत्पत्ति हुई है

193

रंगमहल, जहाँ से कुषाणोत्तर काल के सिक्के प्राप्त हुए हैं, स्थित है

194

राजपूताना की वह रियासत जिसके सिक्कों पर एक ओर साम्राज्ञी विक्टोरिया का चेहरा और अंग्रेजी में विक्टोरिया एम्प्रैस लिखा होता था और दूसरी ओर नागरी तथा उर्दू लिपि में महाराजा का नाम लिखा होता था

195

राजस्थान के जनपदों में सर्वाधिक सिक्के प्राप्त हुए हैं

196

रैढ़ जहाँ से चांदी की आहत् मुद्राएँ एक साथ मिली हैं,

197

वंशावली व उनकी विजयों का उल्लेख किया गया है, वह संबंधित है

198

वह अभिलेख जिसमें अमृत मंथन की कथा एवं उसके सम्बन्ध में लगाये गये कर तथा चार मोरिय (मौर्य) राजाओं यथा- मेहश्वर, भीम, भोज, एवं मान का उल्लेख है

199

वह अभिलेख जिसमें कल्हण एवं कीर्तिपाल के साथ-साथ मारवाड़ की राजनैतिक स्थिति व शासन व्यवस्था का ज्ञान प्राप्त होता है

200

वह उत्खनन स्थल जहाँ से चांदी की मुद्रा ‘पंचमार्क’ प्राप्त हुयी है