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समरसिंह के समय के शिलालेख अभी तक प्राप्त हो चुके हैं
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सूत्रधार था
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स्वरूप सिंह के साथ इनकी वह पासवान जो सती हो गई थी
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हठी शासक के नाम से जाना जाता है
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हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के साथ एकमात्र मुस्लिम सरदार थे
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‘मेवाड़ की आँख’ व ‘संकटकालीन राजधानी’ के नाम से जाना जाता है
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1457 पराजित किया
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अभिनव भरताचार्य, हिन्दू सुरताण, हालगुरु, दानगुरु, छापगुरु, राणारासो, राजगुरु, रायरायन, परमगुरु आदि उपाधियाँ थी
उत्तर
मेवाड़ महाराणा कुम्भा की
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आपातकालीन राजधानी रहा
185
कीर्ति स्तम्भ की ऊँचाई है
186
कुम्भा की उपाधियों का उल्लेख प्राप्त होता है
उत्तर
कुम्भलगढ़ प्रशस्ति में
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केलवाड़ा को महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध के समय अपना मुख्य नियंत्रण केन्द्र बनाया, यह स्थान स्थित है
188
गुहिल वंशीय शासक महाराणा जयसिंह ने निर्माण करवाया
189
चित्तौड़ दुर्ग का तीसरा जौहर हुआ
उत्तर
फूलकंवर के नेतृत्व में
190
जनासागर प्रशस्ति की रचना की थी
191
तेजसिंह की पत्नी जयतल्लदेवी ने चित्तौड़ में निर्माण करवाया
उत्तर
श्याम-पार्श्वनाथ मंदिर का
192
तेजसिंह के समय 1253-54 ई. में मेवाड़ पर आक्रमण किया
उत्तर
दिल्ली सुल्तान बलबन ने
193
नई राजधानी थी
194
प्रसिद्ध झील पिछोला का निर्माण हुआ था
195
महाराणा कुम्भा की राणो-रासो उपाधि का अर्थ है
उत्तर
विद्वानों का आश्रयदाता
196
महाराणा कुम्भा को धनुष विद्या में निपुण होने के कारण उपाधि प्रदान की गई
197
महाराणा प्रताप का स्मारक स्थित है
उत्तर
बांड़ौली (उदयपुर) में
198
महाराणा प्रताप के बचपन का नाम था
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मेवाड़ का वह प्रथम शासक जिसने ई. में ईस्ट इण्डिया
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मेवाड़ का वह शासक जिसके काल को राजपूत काल का अभ्युदय कहा जाता है