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राजस्थान का इतिहास

गुहिल वंश का इतिहास

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176

समरसिंह के समय के शिलालेख अभी तक प्राप्त हो चुके हैं

177

सूत्रधार था

178

स्वरूप सिंह के साथ इनकी वह पासवान जो सती हो गई थी

179

हठी शासक के नाम से जाना जाता है

180

हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के साथ एकमात्र मुस्लिम सरदार थे

181

‘मेवाड़ की आँख’ व ‘संकटकालीन राजधानी’ के नाम से जाना जाता है

182

1457 पराजित किया

183

अभिनव भरताचार्य, हिन्दू सुरताण, हालगुरु, दानगुरु, छापगुरु, राणारासो, राजगुरु, रायरायन, परमगुरु आदि उपाधियाँ थी

184

आपातकालीन राजधानी रहा

185

कीर्ति स्तम्भ की ऊँचाई है

186

कुम्भा की उपाधियों का उल्लेख प्राप्त होता है

187

केलवाड़ा को महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध के समय अपना मुख्य नियंत्रण केन्द्र बनाया, यह स्थान स्थित है

188

गुहिल वंशीय शासक महाराणा जयसिंह ने निर्माण करवाया

189

चित्तौड़ दुर्ग का तीसरा जौहर हुआ

190

जनासागर प्रशस्ति की रचना की थी

191

तेजसिंह की पत्नी जयतल्लदेवी ने चित्तौड़ में निर्माण करवाया

192

तेजसिंह के समय 1253-54 ई. में मेवाड़ पर आक्रमण किया

193

नई राजधानी थी

194

प्रसिद्ध झील पिछोला का निर्माण हुआ था

195

महाराणा कुम्भा की राणो-रासो उपाधि का अर्थ है

196

महाराणा कुम्भा को धनुष विद्या में निपुण होने के कारण उपाधि प्रदान की गई

197

महाराणा प्रताप का स्मारक स्थित है

198

महाराणा प्रताप के बचपन का नाम था

199

मेवाड़ का वह प्रथम शासक जिसने ई. में ईस्ट इण्डिया

200

मेवाड़ का वह शासक जिसके काल को राजपूत काल का अभ्युदय कहा जाता है