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बादले की झालर जो सद्-विवाहिता की साड़ी के आंचल और घूंघट वाले हिस्से में लगता है, कहलाता है
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बूँदों के आधार पर बनी डिजाइन कहलाती है
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बड़ी-बड़ी चौकोर बूंदों से युक्त अलंकरण को कहते हैं
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मुनव्वती कला प्रसिद्ध है
180
रंगीन बेल्जियम काँच पर सोने का सूक्ष्म चित्रांकन करने की कला कहलाती है
181
राजस्थान के कोटा और बारां जिले में बनाई जाने वाली ‘चूंदडी’ का कार्य है
उत्तर
टाई एवं डाई प्रकार का
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राजस्थान में कोफ्तगिरी के काम के लिए प्रसिद्ध हैं
183
रामदला तथा कृष्णदास की पड़ का चित्रण किया गया
184
रूक्नुद्दीन राजस्थानी चित्रकला शैली सम्बद्ध थी
185
लकड़ी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध स्थान है
उत्तर
पाली जिले का बगड़ी नगर
186
लहरिया की धारियाँ एक-दूसरे को काटने पर उसे कहते हैं
187
लाख का कार्य करने वाला कहलाता है
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वह पड़ जिसको कामड़ जाति द्वारा पढ़ा जाता है, इसका निर्माण चौथमल जोशी द्वारा किया गया तथा इसके वाचन के समय रावणहत्था वाद्य यंत्र का वादन किया जाता है
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वह पड़ जिसमें बिना वाद्य के दिन में भाट जाति के भोपे वाचन करते हैं
उत्तर
रामदला व कृष्णदला की पड़
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वह पड़ जिसमें सर्प का चित्रांकन होता है, घोड़ी को हरे रंग से चित्रित किया जाता है और गुर्जर जाति के भोपे इसका वाचन करते हैं
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वह शासक जिसके समय से बीकानेरी चित्रकला का प्रारम्भ माना जाता है
192
वुडन कार्विंग आर्ट के लिए प्रसिद्ध जिला है
193
सीकर क्षेत्र के फूल भाटी तथा बाघ भाटी प्रसिद्ध रहे
194
सुनहरे धागों में कढ़ाई का कार्य कहलाता है
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हल्दीया (पीला) रंग का होता है
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‘गीत गोविंदसार’ का सम्बन्ध है