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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : कलाएँ, चित्रकलाएँ एवं हस्तशिल्प

196 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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176

बादले की झालर जो सद्-विवाहिता की साड़ी के आंचल और घूंघट वाले हिस्से में लगता है, कहलाता है

177

बूँदों के आधार पर बनी डिजाइन कहलाती है

178

बड़ी-बड़ी चौकोर बूंदों से युक्त अलंकरण को कहते हैं

179

मुनव्वती कला प्रसिद्ध है

180

रंगीन बेल्जियम काँच पर सोने का सूक्ष्म चित्रांकन करने की कला कहलाती है

181

राजस्थान के कोटा और बारां जिले में बनाई जाने वाली ‘चूंदडी’ का कार्य है

182

राजस्थान में कोफ्तगिरी के काम के लिए प्रसिद्ध हैं

183

रामदला तथा कृष्णदास की पड़ का चित्रण किया गया

184

रूक्नुद्दीन राजस्थानी चित्रकला शैली सम्बद्ध थी

185

लकड़ी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध स्थान है

186

लहरिया की धारियाँ एक-दूसरे को काटने पर उसे कहते हैं

187

लाख का कार्य करने वाला कहलाता है

188

वह पड़ जिसको कामड़ जाति द्वारा पढ़ा जाता है, इसका निर्माण चौथमल जोशी द्वारा किया गया तथा इसके वाचन के समय रावणहत्था वाद्य यंत्र का वादन किया जाता है

189

वह पड़ जिसमें बिना वाद्य के दिन में भाट जाति के भोपे वाचन करते हैं

190

वह पड़ जिसमें सर्प का चित्रांकन होता है, घोड़ी को हरे रंग से चित्रित किया जाता है और गुर्जर जाति के भोपे इसका वाचन करते हैं

191

वह शासक जिसके समय से बीकानेरी चित्रकला का प्रारम्भ माना जाता है

192

वुडन कार्विंग आर्ट के लिए प्रसिद्ध जिला है

193

सीकर क्षेत्र के फूल भाटी तथा बाघ भाटी प्रसिद्ध रहे

194

सुनहरे धागों में कढ़ाई का कार्य कहलाता है

195

हल्दीया (पीला) रंग का होता है

196

‘गीत गोविंदसार’ का सम्बन्ध है