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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : लोक देवता, लोक देवियाँ, संत एवं सम्प्रदाय

269 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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176

रामस्नेही सम्प्रदाय अपना फूलडोल महोत्सव मनाते हैं

177

लालनाथजी, चोखननाथजी, सवाईदासजी आदि प्रमुख संत हुए हैं

178

लोक संत पीपाजी का प्रमुख पूजास्थल है

179

वल्लभाचार्य को ‘महाप्रभु’ की उपाधि प्रदान की थी

180

वह संत जिसने काशी के अस्सी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास के साथ निवास किया था

181

वह संत जिसने नादिरशाह के आक्रमण की भविष्यवाणी की थी

182

वह संत जिसने राजपाट छोड़कर संन्यास ग्रहण किया था

183

वह संप्रदाय जो ‘श्री संप्रदाय’ या ‘बैरागी संप्रदाय’ के नाम से भी जाना जाता है

184

विश्नोई सम्प्रदाय की सर्वाधिक मान्यता है

185

श्रीनाथ जी का मंदिर संबंधित है

186

संत मावजी ने अछूतों के उद्धार हेतु चलाया

187

संत रज्जब जी के प्रमुख ग्रंथ हैं

188

संत रामदासजी के गुरु थे

189

संत लालदास जी का जन्म व मृत्यु क्षेत्र है

190

संत लालदास जी ने दीक्षा ली थी

191

संत सुंदरदास जी की प्रधान पीठ (प्रधान थांबा) स्थित है

192

संत सुंदरदासजी द्वारा रचित रचना है

193

साबला, पुंजपुर और शेषपुर मंदिर से संबंध है

194

सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त जात-पाँत व बाह्य आडम्बरों से मुक्ति दिलवाने के लिए सामाजिक सुधारों पर बल दिया

195

‘अणुभाष्य’ लिखकर ‘शुद्धाद्वैत’ दर्शन का प्रतिपादन किया

196

‘गुरु दीक्षा’, ‘डोली पहल’ एवं ‘थापन’ संस्कार का संबंध है

197

‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ एवं ‘बावन वैष्णवों की वार्ता’ ग्रन्थ संबंधित है

198

‘जीव-समझोतरी’ तथा ‘यशोनाथ पुराण’ सम्बन्धित ग्रंथ हैं

199

‘बांगण के धणी’ के रूप में प्रसिद्ध हैं

200

‘वागड़ की मीरा’ कही जाने वाली गवरी बाई का जन्म राजस्थान में हुआ था