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रामस्नेही सम्प्रदाय अपना फूलडोल महोत्सव मनाते हैं
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लालनाथजी, चोखननाथजी, सवाईदासजी आदि प्रमुख संत हुए हैं
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लोक संत पीपाजी का प्रमुख पूजास्थल है
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वल्लभाचार्य को ‘महाप्रभु’ की उपाधि प्रदान की थी
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वह संत जिसने काशी के अस्सी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास के साथ निवास किया था
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वह संत जिसने नादिरशाह के आक्रमण की भविष्यवाणी की थी
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वह संत जिसने राजपाट छोड़कर संन्यास ग्रहण किया था
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वह संप्रदाय जो ‘श्री संप्रदाय’ या ‘बैरागी संप्रदाय’ के नाम से भी जाना जाता है
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विश्नोई सम्प्रदाय की सर्वाधिक मान्यता है
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श्रीनाथ जी का मंदिर संबंधित है
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संत मावजी ने अछूतों के उद्धार हेतु चलाया
187
संत रज्जब जी के प्रमुख ग्रंथ हैं
उत्तर
सर्वंगी, अंगबधू और रज्जबवाणी
188
संत रामदासजी के गुरु थे
189
संत लालदास जी का जन्म व मृत्यु क्षेत्र है
190
संत लालदास जी ने दीक्षा ली थी
उत्तर
संत गद्दन चिश्ती से
191
संत सुंदरदास जी की प्रधान पीठ (प्रधान थांबा) स्थित है
192
संत सुंदरदासजी द्वारा रचित रचना है
उत्तर
ज्ञान समुद्र, ज्ञान रवैया और सुंदर ग्रंथावली
193
साबला, पुंजपुर और शेषपुर मंदिर से संबंध है
194
सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त जात-पाँत व बाह्य आडम्बरों से मुक्ति दिलवाने के लिए सामाजिक सुधारों पर बल दिया
उत्तर
संत दादूदयाल, संत रामचरण जी और संत जसनाथजी ने
195
‘अणुभाष्य’ लिखकर ‘शुद्धाद्वैत’ दर्शन का प्रतिपादन किया
196
‘गुरु दीक्षा’, ‘डोली पहल’ एवं ‘थापन’ संस्कार का संबंध है
उत्तर
विश्नोई संप्रदाय से
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‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ एवं ‘बावन वैष्णवों की वार्ता’ ग्रन्थ संबंधित है
198
‘जीव-समझोतरी’ तथा ‘यशोनाथ पुराण’ सम्बन्धित ग्रंथ हैं
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‘बांगण के धणी’ के रूप में प्रसिद्ध हैं
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‘वागड़ की मीरा’ कही जाने वाली गवरी बाई का जन्म राजस्थान में हुआ था