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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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201

यज्ञ, विवाह आदि की समाप्ति पर ब्राह्मणों को दी जाने वाली दक्षिणा कहलाती है

202

यज्ञाग्नि में घी इत्यादि की आहूति देने हेतु प्रयुक्त लकड़ी का चम्मच कहलाता है

203

रथ या बैलगाड़ी की मचान से आशय है

204

वह गठरी जिसमें वस्त्र या फुटकर सामग्री बांधी जाती है, कहलाती है

205

वह चूड़ी जिस पर सोने या चाँदी के पत्तर का बंद लगा हो, उसे कहते हैं

206

वांछित फल प्राप्ति की कामना से देवी-देवता को नैवेद्य चढ़ाने का किया हुआ संकल्प कहलाता है

207

विवाह में नाई द्वारा किया जाने वाला दस्तूर विशेष वह इस रस्म पर दिये जाने वाले नेग को कहते हैं

208

शवयात्रा में साथ ले जाने का मिट्टी का एक जलपात्र है

209

संबंधियों को संबोधित करते हुए व्यंग वचनों से गाये जाने वाले लोकगीत को कहते हैं

210

सामान रखने हेतु कमरे में ऊपर की ओर चौड़ाई में दीवार के सहारे लगाई गई पत्थर की शिला (पट्टी) कहलाती है

211

सूँठ की साड़ियाँ प्रसिद्ध हैं

212

स्त्रियों के पाँव का आभूषण है

213

स्त्रियों के सिर का आभूषण है

214

स्वर्णकारों का एक औजार है

215

अंगरखी का ग्रामीण भाषा में अन्य नाम है

216

अकाल पड़ने पर मवेशियों को चारा-पानी के लिए अन्य प्रदेश में ले जाना कहलाता है

217

अमरशाही नाम है

218

ओढ़ने का वस्त्र, दुपट्टा कहलाता है

219

कटार रखने की चमड़े की पेटी को कहते हैं

220

किसी देवता या पीर के सोने-चाँदी या पत्थर आदि पर खुदे पदचिह्न को कहते हैं

221

किसी लेख आदि का सारांश कहलाता है

222

केवड़ौ, कांमण, कोयलड़ी और खटमल हैं

223

कोल्हू के बैल की आँखों पर बाँधा जाने वाला ढक्कन है

224

गर्म पानी मेंं दवाई डालकर उसकी भाप से किया जाने वाला सेक है

225

घी, तेल आदि रखने का ऊँट के चमड़े का एक बर्तन विशेष है