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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : संगीत, नृत्य, नाट्य एवं वाद्ययंत्र

227 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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201

भरतपुर व धौलपुर जिले में मुख्यत: प्रचलित है

202

मृदंग की आकृति का मिट्टी से बना लोक वाद्य जो मोलेला गांव में विशेषत: बनाया जाता है

203

मेवाड़ के रावल व भाट जाति के लोग रम्मतों में मुख्यत: बजाते हैं

204

मोरिया, जीरा तथा चिरमी हैं

205

रम्मत नामक रंगमंच/नाट्य संबंधित है

206

राग कल्पदु्रम के रचयिता हैं

207

रागमाला, रागमंजरी और नर्तन निर्णय नामक संगीत ग्रंथ रचित है

208

राजस्थान की प्रथम महिला धु्रपद गायिका हैं

209

राजस्थान के अलवर, सवाई माधोपुर जिलों में विशेष रूप से प्रचलित है

210

राजस्थान के दौसा जिले में प्रसिद्ध है

211

राजस्थान में तुर्रा-कलंगी लोक नाट्यों का प्रचलन प्रारम्भ हुआ

212

राजस्थान में प्रथम पारसी थियेटर (रंगमंच) की स्थापना की गई

213

राजस्थान में सबसे लम्बा गीत है

214

रात्रि-जागरण के समाप्त होने पर ब्रह्म मुहूर्त में गाए जाने वाले गीत कहलाते हैं

215

लंगा जाति द्वारा सतारा एवं मुरला की संगत में बजाया जाने वाला एक तत् वाद्य है

216

लोक नाट्य कला स्वांग को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई

217

वर्तमान में पाली जिले में वादन होता है

218

वह वाद्य जिसका संबंध नारद जी से जोड़ा गया है

219

वह शासक जिसने तमाशा लोक नाट्य विधा को प्रोत्साहित किया

220

सबसे विकसित सारंगी जो शास्त्रीय सारंगी के अधिक नजदीक समझी जाती है

221

सुरनाई वाद्य के लिए प्रसिद्ध हैं

222

सुषिर वाद्य शहनाई वाद्य का दूसरा नाम है

223

हाड़ौती क्षेत्र का एक लोकगीत है

224

हाड़ौती व ढूँढाड़ क्षेत्र में मेलों के अवसर पर अलगोजा, ढोलक व मंजीरे के साथ गाये जाने वाला लोकगीत है

225

‘गाली गीत’ भी कहते हैं