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राजस्थान की कला एवं संस्कृति
राजस्थान : संगीत, नृत्य, नाट्य एवं वाद्ययंत्र
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201
भरतपुर व धौलपुर जिले में मुख्यत: प्रचलित है
202
मृदंग की आकृति का मिट्टी से बना लोक वाद्य जो मोलेला गांव में विशेषत: बनाया जाता है
203
मेवाड़ के रावल व भाट जाति के लोग रम्मतों में मुख्यत: बजाते हैं
204
मोरिया, जीरा तथा चिरमी हैं
सही उत्तर
राजस्थानी लोकगीत
205
रम्मत नामक रंगमंच/नाट्य संबंधित है
सही उत्तर
बीकानेर क्षेत्र से
206
राग कल्पदु्रम के रचयिता हैं
सही उत्तर
कृष्णानन्द व्यास
207
रागमाला, रागमंजरी और नर्तन निर्णय नामक संगीत ग्रंथ रचित है
सही उत्तर
पुण्डरीक विट्ठल द्वारा
208
राजस्थान की प्रथम महिला धु्रपद गायिका हैं
209
राजस्थान के अलवर, सवाई माधोपुर जिलों में विशेष रूप से प्रचलित है
210
राजस्थान के दौसा जिले में प्रसिद्ध है
सही उत्तर
हेला ख्याल दंगल
211
राजस्थान में तुर्रा-कलंगी लोक नाट्यों का प्रचलन प्रारम्भ हुआ
212
राजस्थान में प्रथम पारसी थियेटर (रंगमंच) की स्थापना की गई
213
राजस्थान में सबसे लम्बा गीत है
214
रात्रि-जागरण के समाप्त होने पर ब्रह्म मुहूर्त में गाए जाने वाले गीत कहलाते हैं
215
लंगा जाति द्वारा सतारा एवं मुरला की संगत में बजाया जाने वाला एक तत् वाद्य है
216
लोक नाट्य कला स्वांग को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई
217
वर्तमान में पाली जिले में वादन होता है
218
वह वाद्य जिसका संबंध नारद जी से जोड़ा गया है
219
वह शासक जिसने तमाशा लोक नाट्य विधा को प्रोत्साहित किया
सही उत्तर
सवाई प्रतापसिंह ने
220
सबसे विकसित सारंगी जो शास्त्रीय सारंगी के अधिक नजदीक समझी जाती है
221
सुरनाई वाद्य के लिए प्रसिद्ध हैं
222
सुषिर वाद्य शहनाई वाद्य का दूसरा नाम है
223
हाड़ौती क्षेत्र का एक लोकगीत है
224
हाड़ौती व ढूँढाड़ क्षेत्र में मेलों के अवसर पर अलगोजा, ढोलक व मंजीरे के साथ गाये जाने वाला लोकगीत है
225
‘गाली गीत’ भी कहते हैं